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राष्ट्रीय
स्मारक
तथा
पुरावशेष
मिशन
भारत के
पास
प्रागैतिहासिक
समय से
निर्मित
विरासत,
पुरातत्वीय
स्थलों
तथा
अवशेषों के
रूप में
असाधारण
रूप से मूल्यवान,
विस्तृत
तथा विविध
सांस्कृतिक
विरासत हैं
। बड़ी संख्या
में स्मारक
ही उत्साहवर्धक
हैं तथा ये
सांस्कृतिक
विचार तथा
विकास
दोनों के
प्रतीक हैं
। अब ऐसा
प्रतीत
होता है कि
भारत की
विरासत को
संस्थापित
करना इसके
विद्यमान
होने में
शासित
प्रक्रिया
तथा किस तरह
यह विरासत
लोगों से
संबंधित है,
के अतीत के
हमारे
ज्ञान, समझ
तथा शायद
रुचि में
कुछ मूलभूत
कमी हुई है
जो सांस्कृतिक
रूपों में
व्यक्त
इसके
आविर्भाव
औद्योगिक
वृद्धि के
युग में
तेजी से बदल
रही जीवन
शैली में
अपनी पारम्परिक
महत्ता को
खो रहे हैं ।
तथापि,
डाटाबेस के
रूप में ऐसा
कोई व्यापक
रिकार्ड
नहीं है
जहां इस
प्रकार के
पुरातात्विक
संसाधनों
को निर्मित
विरासतों,
स्थलों
तथा
पुरावशेषों
के रूप में
सन्दर्भित
किया जा
सकता है ।
इसके
परिणामस्वरूप
हमारे देश
में सीमित,
गैर-नवीकरणीय
तथा गैर-प्रतिवर्ती
संसाधन
भावी
पीढ़ियों
के लिए कोई
रिकार्ड
रखे बिना
तेजी से
विलुप्त
हो रहे हैं ।
अत: इस
प्रकार के
संसाधनों
के उपयुक्त
सर्वेक्षण
की तुरन्त
आवश्यकता
है और इसके
आधार पर एक
उपयुक्त
पुरातात्विक
विरासत
संसाधन
प्रबंधन
तथा नीति
तैयार की जा
सकती है।
उपरोक्त
के
परिप्रेक्ष्य
में, भारत के
माननीय
प्रधानमंत्री
ने वर्ष 2003
में स्वतंत्रता
दिवस पर
राष्ट्रीय
मूर्त
विरासत
मिशन स्थापित
करने की
घोषणा की
थी।
तदनुसार 19
मार्च 2007 को
राष्ट्रीय
स्मारक
तथा
पुरावशेष
मिशन की स्थापना
की गई ।
समय
सीमा तथा
क्षेत्र
राष्ट्रीय
स्मारक
तथा
पुरावशेष
मिशन का
प्रत्येक
राज्य तथा
संघ-शासित
क्षेत्र
में स्वतंत्र
कार्य
प्रणाली
नीति सहित
पूरे देश
में अपनी
गतिविधियां
शुरू करने
का प्रस्ताव
है । यह
परिकल्पना
की जाती है
कि मिशन का
उद्देश्य
पांच
वर्षों
अर्थात् 2007-2012
की
निर्धारित
समय सीमा
में प्राप्त
कर लिया
जाना चाहिए
।
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