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मुमताज
महल
संग्रहालय,
लाल किला
यह
संग्रहालय
दिल्ली के
लाल किले के
एक महल में
स्थित है।
ऐसा माना
जाता है कि
यह महल
शाहजहॉं ने
अपनी बेगम
अर्जमंद
बानो बेगम,
जिन्हें
मुमताज महल
के नाम से
जाना जाता
है, के लिए
बनवाया था।
इसमें मुगल
काल से
संबंधित
वस्तुओं
को कथ्यपरक
ढंग से 6
दीर्घाओं
में
प्रदर्शित
किया गया
है।
प्रथम
कुछ
प्रदर्शन
मंजूषाओं
में सम्राट
अकबर तथा
उसके उत्तराधिकारियों
से संबंधित
वस्तुएं
प्रदर्शित
है, जिनमें
लघुचित्र,
पाण्डुलिपियॉं,
शिलालेख,
फ़रमान (शाही
आदेश) आदि
सम्मिलित
हैं। इनमें
से एक
प्रदर्शन
मंजूषा में 17वीं
शताब्दी
का पीतल के (एस्ट्रोलेबस)
खगोलीय-प्रयोगशाला
प्रदर्शित
है जिसे
खगोलीय
गणनाओं यथा
खगोलीय
पिण्डों
के बीच दूरी,
दिन तथा
रात्रि के
समय आदि की
गणना के लिए
इस्तेमाल
किया जाता
था। अगली
दीर्घा में
चीनी
मिट्टी,
सेलाडान (काही)
तथा जेड की
वस्तुएं,
वस्त्र
तथा चमकीली
टाइलें आदि
हैं। मुगल
जेड (संगयशब)
पत्थरों
की वस्तुओं
में
सर्वाधिक
विशिष्ट
वस्तु
तलवारों और
छुरों के
मूठ हैं जो
सामान्यत:
सपाट है
परंतु इन्हें
सुंदर
तरीके से
उत्कीर्ण
और तैयार
किया गया
है। परदे,
कालीन, तकिए,
गद्दियां
और परिधान
भी
संग्रहालय
में
प्रदर्शित
हैं।
बहादुर
शाह जफर
दीर्घा में
अंतिम मुगल
बादशाह
बहादुर शाह
और उसकी
रानी की वस्तुएं,
जैसे
परिधान,
कलमदान,
दवात, कैची,
बारूद वाले
श्रृंग,
गुलाबजल
छिड़कने की
शीशी,
प्रसाधन
बाक्स इत्यादि
रखी हुई
हैं।
बहादुर शाह-II की
सुलेख कला
के दो नमूने,
हाथी दांत
की एक छोटी
मूर्ति, जो
जीनत महल की
मानी जाती
है और रंगून
की जेल में
बहादुर शाह
के अन्तिम
दिनों का एक
छायाचित्र
विशेष उल्लेखनीय
हैं।
1857
के युद्ध
में पटौदी
के तत्कालीन
नवाब
द्वारा इस्तेमाल
किए गए
हथियार,
बहादुर शाह
द्वारा
उपयोग किए
गए हथियार
और दिल्ली
की घेरेबन्दी
के दौरान
जनरल जे.
निकलसन
द्वारा
उपयोग किया
गया फील्ड
ग्लास भी
देखे जा
सकते हैं।
अन्तिम
मुगल
शासकों और
उनके
समकालीन व्यक्तियों
जैसे
मिर्जा
गालिब के
चित्र, दिल्ली
के दृश्यों
को दर्शाने
वाले
मानचित्र
और अश्मलेख,
रानी विक्टोरिया
को बहादुर
शाह द्वारा
भेजा गया
पत्र, जिस पर
उनके पुत्र
जवान बख़्त
के अंगूठे
का निशान है,
संग्रहालय
में
प्रदर्शित
कुछ अन्य
रोचक वस्तुएं
हैं।
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