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स्वतंत्रता
सेनानी
संग्रहालय,
लाल किला (नई
दिल्ली)
लाल
किले के उत्तर
पूर्व में
स्थित
सलीमगढ़ का
निर्माण
इस्लाम
शाह सूर (1545-1554 ई.)
द्वारा
किया गया था,
जिसे सलीम
शाह के नाम
से भी जाना
जाता है और
वह शेर शाह
सूर (1540-1545 ई.) का
पुत्र और
उत्तराधिकारी
था। यह 1552 में
सलीम शाह की
मृत्यु के
दौरान
अधूरा ही बन
पाया था।
इसकी योजना
मोटे तौर पर
लगभग 1 कि.मी.
की दीवारों
के घेरे के
साथ
अर्धवृत्ताकार
है और यह मूल
रूप से
यमुना नदी
के पश्चिमी
तट के समीप
एक
द्वीपनुमा
स्थल पर स्थित
था।
सलीमगढ़
किले का एक
भाग 1995 में
भारतीय स्वतंत्रता
सेनानियों
के स्मारक
के रूप में
विकसित
किया गया है,
जिसे
भारतीय
पुरातत्व
सर्वेक्षण
ने प्रारम्भ
में भारतीय
सेना से
प्राप्त
किया था।
शाहनवाज़
खान, प्रेम
कुमार सहगल,
गुरबख्श
सिंह ढिल्लों
तथा इंडियन
नेशनल
आर्मी के
सैकड़ों
अन्य
सैनिकों को
कैद किए
जाने के लिए
प्रयोग किए
जाने वाली
दो बैरकों
तथा अन्य
बैरकों को
स्मारक के
रूप में रखा
जा रहा है।
यह स्मारक
मूल रूप से 1916
ई. में
ब्रिटिश
सेना
द्वारा
बनाया गया
एक गार्ड
रूम था। लाल
किले में
हुए
ऐतिहासिक
आई.एन.ए.
मुकदमे के
दौरान अनेक
कैदियों को
यहॉं बन्द
रखा गया था।
भारतीय
पुरातत्व
सर्वेक्षण
ने भारत
छोड़ो आन्दोलन
की 50वीं
वर्षगांठ
के अवसर पर 1992
में
संरक्षण और
परिरक्षण्
के उद्देश्य
से इन
बैरकों को
भारतीय
सेना से ले
लिया और आई.एन.ए.
के वीरों को
समर्पित
किया।
कर्नल
प्रेम
कुमार
द्वारा
पहनी गई आई.एन.ए.
की वर्दी,
कर्नल
गुरबख्श
सिंह ढिल्लों
के
घुड़सवारी
के जूते और
कोट के बटन,
नेताजी
सुभाषचन्द्र
बोस तथा अन्य
व्यक्तियों
के
छायाचित्र
प्रदर्शित
किए गए हैं।
एक दीर्घा
में 1995 में
किले के अन्दर
भारतीय
पुरातत्व
सर्वेक्षण
द्वारा की
गई खुदाई
में निकली
सामग्रियॉं
तथा खुदाई
के
छायाचित्र
भी
प्रदर्शित
है।
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