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पुरातत्वीय
संग्रहालय,
लोथल
(जिला
अहमदाबाद,
गुजरात)
इस
संग्रहालय
की स्थापना
1952 से 1961 के
दौरान की गई
खुदाइयों
से प्राप्त
शिल्प
उपकरणों को
प्रदर्शित
करने के लिए
सन् 1976 में की
गई।
संग्रहालय
में तीन
दीर्घाएं
हैं। सामने
वाली
दीर्घा एक
कलाकार के
लोथल के
हड़प्पाकालीन
कस्बे के
अनुमानिक
विचार को
चित्रित
करती है।
यहॉं पर इस
स्थान के
बारे में
परिचायक
प्रशंसात्मक
विवरण तथा
नक्शे भी
हैं। बायीं
ओर की
दीर्घा में
खुदाई से
प्राप्त
मणिकाएं,
टेराकोटा
के आभूषण,
मुद्रा तथा
मुद्रांकन
की
प्रतिकृतियॉं,
सीप तथा
हाथी दॉंत
की वस्तुएं,
तांबे तथा
कांसे की
वस्तुएं,
औजार तथा
मिट्टी के
बर्तनों की
प्रदर्शन
मंजूषाएं
हैं। दायीं
ओर की
दीर्घा में
खेल की वस्तुएं,
पशुओं तथा
मनुष्यों
की
लघुमूर्तियाँ,
बाट,
चित्रित
मिट्टी के
बर्तन,
कब्रिस्तानों
से
प्राप्त
वस्तुएं
तथा
धार्मिक
वस्तुएं,
लघु
मृदभांड,
ईंटे तथा
संयुक्त
रूप से
दफनाने की
एक
प्रतिकृति
और लोथल के
स्थल का एक
मानधारी
मॉडल शामिल
है। खुदाई
से प्राप्त
5089 वस्तुओं
में से 800 वस्तुएं
संग्रहालय
में
प्रदर्शित
की गई हैं।
प्रदर्शित
पुरावस्तुओं
के अतिरिक्त,
मनके,
सेलखड़ी की
मुद्राएं
जिन पर एक
श्रृंगी
मूलभाव और
अभिलेख
अंकित है,
हाथी के
मूलभाव
वाली
टेराकोटा
मुद्रांकन,
फारस की
खाड़ी की
शैली वाली
मुदा, सोने
का गले का
हार, तांबे/कांसे
के मछली
पकड़ने के
कांटे, कंगन,
स्टैण्ड
पर रखी तश्तरी,
छिद्रों
वाला
मर्तबान, प्यासे
कौवे और
चालाक
लोमड़ी की
कहानियों
के चित्र
वाला
मर्तबान,
टेराकोटा
का सांड़,
घोड़ा, नाव
की
प्रतिकृति,
मम्मी की
प्रतिकृति,
हाथी दांत
का पैमाना
और सीप का
दिकसूचक,
चौपड़ का
पासा इत्यादि
सर्वाधिक
आकर्षक
पुरावस्तुएं
हैं।
संग्रहालय
में एक छोटा
सन्दर्भ
पुस्तकालय
और पुरातत्वीय
स्मारकों
से सम्बन्धित
प्रकाशनों
को बेचने के
लिए एक
प्रकाशन
काउण्टर
है।
खुले
रहने का समय :
10.00 बजे
पूर्वाह्न
से 5.00 बजे
अपराह्न
बंद
रहने का दिन-शुक्रवार
प्रवेश
शुल्क : 2/- रू.
प्रति व्यक्ति
(15 वर्ष तक
के बच्चों
के लिए नि:शुल्क)
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