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पुरातत्वीय
संग्रहालय,
वैशाली
(जिला
वैशाली,
बिहार)
यह
संग्रहालय
इस क्षेत्र
में और इसके
आसपास
खोजबीन और
उत्खनन के
दौरान पाई
गई पुरावस्तुओं
के
परिरक्षण
के लिए 1971 में
स्थापित
किया गया
था। इसमें
चार
दीर्घाएं
हैं।
प्रथम
दीर्घा में
मानव
मूर्तिकाओं,
नैगमेश
माता और
शिशु,
दुर्गा,
बुद्ध के
चित्र वाली
पटिया, एक
अन्य
पटिया
जिसमें
बोधिसत्व
का चित्र
दर्शाया
गया है और एक
महिला की
मूर्ति
प्रदर्शित
है। इसके
अलावा, पत्थर
की
छत्रावली,
ढलवां ईंटे
और खपरैल भी
प्रदर्शित
किए गए हैं।
द्वितीय
दीर्घा में
महत्वपूर्ण
प्रदर्शित
वस्तुओं
में भेड़,
हाथी, घोड़े,
सांड़, कुत्ते,
बंदर,
पक्षियों,
सांप के फण
की
टेराकोटा
मूर्तिकाएं,
मुद्राएं
और
मुद्रांकन,
पहिये,
झुनझुना,
मनके,
टेराकोटा
का मलपात्र,
तांबे के
आहत और
ढलवां सिक्के
इत्यादि
शामिल हैं।
एन बी पी
और पी जी डब्ल्यू
के पात्र के
टुकड़े,
हिरण के
सींग, हड्डी,
कंगन, तीर का
शीर्ष भाग,
चाकू, कील,
घंटी इत्यादि
जैसे औजार
तृतीय
दीर्घा में
प्रदर्शित
किए गए हैं।
चतुर्थ
दीर्घा में
कटोरे, तश्तरी,
सूक्ष्म
पात्र,
गुलदस्ते,
लैंप, दावात,
ढक्कन-घंटी,
जल छिड़कने
के पात्र और
टोंटी इत्यादि
जैसे
मिट्टी की
वस्तुएं
प्रदर्शित
की गई है।
खुले
रहने का समय :
10.00 बजे
पूर्वाह्न
से 5.00 बजे
अपराह्न तक
बंद
रहने का दिन -
शुक्रवार
प्रवेश
शुल्क : 2/- रू.
प्रति व्यक्ति
(15
वर्ष तक के
बच्चों के
लिए नि:शुल्क)
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